बीएचयू में संस्कृत के साथ उर्दू को मिलीं उंचाइयां, मौलवी महेश प्रसाद को महामना लाए थे यूनिवर्सिटी

बीएचयू में संस्कृत के साथ उर्दू को मिलीं उंचाइयां, मौलवी महेश प्रसाद को महामना लाए थे यूनिवर्सिटी


बीएचयू उर्दू विभाग के वर्तमान विभागाध्यक्ष डॉ.आफताब अहमद अफाकी बताते हैं गांव-गिरांव में पदयात्रा करते समय मौलवी महेश कई बार मुनादी करने वाले अंदाज में लोगों से मुखातिब होकर गालिब के खतों के बारे में दरियाफ्त करते। वर्ष 1974 में जब उर्दू, अरबी और फारसी के  विभाग अलग-अलग हो गए, तब से लेकर वर्ष 1991 तक प्रो. हुकुमचंद नैयर ने उर्दू विभाग की कमान संभाली। जबकि इसके बाद प्रो.राकेश मिश्र और डॉ. अमृतलाल इशरत ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया। 


प्रो. ऋषि शर्मा बढ़ा रहे परंपरा को आगे
सनातनी आस्था वाले परिवार के सदस्यों द्वारा बीएचयू के उर्दू विभाग की सेवा परंपरा का परचम इन दिनों पश्चिम बंगाल के ऋषि शर्मा के हाथों में है। असिस्टेंट प्रोफेसर ऋषि का जन्म पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर जिले में हुआ। बचपन से मदरसे में शिक्षा ग्रहण करने के बाद आगे की शिक्षा उन्होंने बिहार के किशनगंज इंटर कॉलेज,अलीगढ़ विश्वविद्यालय और जेएनयू में क्रमश: ग्रहण की। बंगाल के इस्लामपुर कॉलेज में पांच वर्ष अध्यापन के बाद वर्ष 2015 में उन्हें बीएचयू की सेवा का अवसर मिला।